जयराम महतो ने झारखंड मुस्लिम आंदोलनकारी का नाम न लेकर पाप किया है- मुस्लिम लीग।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश महासचिव शान उल हक़ ने कड़े शब्दों में बयान जारी कर कहा है कि जयराम महतो द्वारा रांची प्रेस क्लब में प्रेस को दिए गए हालिया बयान की कड़ी निंदा करते हैं जिसमे उन्होंने कहा है कि झारखंड राज्य अलग करने में पहला दो क़ौम कुर्मी और एस टी का नाम आता है, और शहीद निर्मल महतो के कारण यह राज्य अलग हुआ।

जयराम महतो ने जानबूझकर झारखंड मुस्लिम आंदोलनकारी और उस आंदोलन में शहीद हुए 18 मुस्लिम शहीदों के नाम को न लेने का जो प्रयास किया है, वह न केवल ऐतिहासिक तथ्य को नकारता है, बल्कि शहीदों के बलिदान का भी अपमान करता है, इससे साफ़ जाहिर होता है को वो वेक्ती विशेष समुदाय कि राजनीति कर रहे हैं।

शानुल हक़ ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान कई मुसलमान आंदोलनकारी ने अपने प्रदेश के अधिकार और अलग राज्य की मांग को लेकर अपनी जान की कुर्बानी दी थी यह 18 मुसलमान आंदोलनकारी जिसमे अब्दुल हई से लेकर मोहम्मद सलीम तक अपने साहस और बलिदान के लिए याद किए जाते हैं।

झारखंड आंदोलन के दौरान सभी वर्गों विशेष कर मुसलमानों ने अपना योगदान दिया और शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति देकर राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अलग राज्य का आह्वान करने वाला पहला व्यक्ति अस्मत अली नामक एक मुस्लिम व्यक्ति था।

1927 की शुरुआत में मोमिन कॉन्फ्रेंस ने अलग राज्य की मांग करते हुए गुरमा में एक रैली का आह्वान किया शफीक अंसारी ने क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से मुसलमान की भारी उपस्थिति पर ध्यान दिया था, वहीं मुस्लिम लीग के खान बहादुर हबीबुर रहमान ने जयपाल सिंह मुंडा को अलग झारखंड राज्य के लिए उनकी लड़ाई के लिए लगभग 1 लाख रूपए  दान में दिया था और 1962 में जयपाल सिंह मुंडा ने ज़हूर अली के साथ मिलकर जोलाह कोलाह  भाई भाई का नारा दिया था। जिसे आज भी साजिश के तहत इतिहास से मिटाया जा रहा है।

शहीदों के  बलिदान को याद रखना और सम्मान देना हमारा कर्तव्य है। जयराम महतो का बयान इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सच्चाई को नजरअंदाज करता है और समाज
में विभाजन उत्पन्न करता है।

हमारी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग इस पक्षपाती बयान कि कड़े शब्दों में निंदा करती है।

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