1932 का खतियान लागू करना झारखंडी शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगा-डॉ आरसी मेहता।
हजारीबाग-बिहार से झारखंड का विभाजन झारखंडवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए बना है परंतु झारखंड विभाजन से झारखंडीयों को कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है झारखंड स्थानीय नीति लागू नहीं हुवा है सरकारी नौकरी व्यवसाय एवं राजनीति में 40% बाहरीयो का वर्चस्व है यह बातें हजारीबाग महागठबंधन के पूर्व विधायक प्रत्याशी डॉ आरसी मेहता ने अपने कार्यालय में कहा।
डॉ मेहता ने कहा की झारखंड बाहरियों का चारागाह बना हुआ है। झारखंडी अस्मिता के लिए माननीय झारखंड के मुख्यमंत्री 1932 का खतियान लागू करें। 32 का खतियान लागू करना हेमंत के घोषणा पत्र में था। जेएमएम का गठन ही 1932 के खतियान को लागू करने के लिए बना था। मुझे उम्मीद है की जल्द झारखंड में स्थानीय नीति लागू होगा। जिससे झारखंडी मूल वासियों के आशा के अनुसार कल्याण होगा।
यदि माननीय मुख्यमंत्री 1932 का खतियान लागू नहीं करते हैं उस परिस्थिति में मेरे नेतृत्व में हजारीबाग से 32 का खतियान उलगुलान आंदोलन समस्त झारखंड में शुरू होगा। इसके लिए झारखंड मूलवासी सर्वदलीय आंदोलन हेतु मैं संपर्क में हूं। झारखंडियो का मूल भावना का 22 वर्षों से हनन किया जा रहा है अब मूलवासी शहीद परिवारों का धैर्य टूटता जा रहा है।









