हजारीबाग: हर्सोल्लास के साथ संपन्न हुआ मोहर्रम का त्यौहार।

हजारीबाग: हर्सोल्लास के साथ संपन्न हुआ मोहर्रम का त्यौहार।

हजारीबाग सदर प्रखंड के मेरु में मोहर्रम का त्यौहार शांति सद्भावना के साथ संपन्न हो गया बता दें कि मेरु में पांच गांव का अखाड़ा पहुंचता है इस साल काफी संख्या में लोग इस अखाड़े में पहुंचकर मोहर्रम का त्यौहार मनाया इन पांचों गांव का कर्बला भी मेरु में ही है।

अखाड़े के लोगों ने पारंपरिक लाठी और हथियार के साथ खेल का प्रदर्शन भी दिखाया। मेरु पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया एवं सभी प्रतिनिधियों के साथ सभी अखाड़े के सदर व सेक्रेटरी मौजूद थे साथ ही मुफस्सिल थाने के थाना प्रभारी श्री बजरंग महतो के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अपनी भागीदारी भी खूब निभाया और अखाड़े को शांति और सद्भावना के साथ संपन्न भी कराया मेरु मुखिया सीमा सिंह के द्वारा सभी अखाड़ा धारियों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

मोहर्रम इस्लामी कैलेण्डर का पहला महीना होता है, और यह महीना इस्लाम में गम और मातम का महीना माना जाता है, जिसे मुस्लिम संप्रदाय के लोग मनाते है। मोहर्रम बकरीद के ठीक बिस दिनों के बाद मनाया जाता है। इसे आशूरा भी कहा जाता है।

इस्लाम में यह महीना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, यह इस्लाम के चार पाक महीनों में से एक होता है। क्योंकि इसी महीने हजरत इमाम हुसैन कर्बला के मैदान में शहीद हो गए थे। प्रतिवर्ष लोग उनकी शहादत की याद में मुहर्रम के महीने के दसवें दिन को लोग मातम के तौर पर मनाते हैं, जिसे आशूरा भी कहा जाता है।

इस्लाम की मान्यता के अनुसार इराक में यजीद नाम का बादशाह था, जो की बहुत ही अधिक जालिम था तथा उसे अल्लाह के ऊपर भी विश्वास नहीं था।यजीद चाहता था कि हजरत इमाम हुसैन भी उसका साथ दें। हजरत इमाम हुसैन को यह मंजूर न था, दोनों के बीच जंग छिड़ गई और यजीद ने हुसैन और उनके बहत्तर साथियों को लेकर कर्बला में मैदान में बड़ी ही क्रूरता से हत्या कर दी। इस जंग में वह अपने बेटे, घरवाले और अन्य साथियों के साथ शहीद हो गए। इसी की याद में हर साल मुहर्रम मनाया जाता है।

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