हजारीबाग; हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बकरीद का त्यौहार।

हजारीबाग; हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बकरीद का त्यौहार।

हजारीबाग में आज बकरीद का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया सभी मस्जिदों में सुबह 5:00 बजे से ही बकरीद की नमाज अदा करने के लिए लोग मस्जिदों में पहुंचने लगे हजारीबाग के जामा मस्जिद सरदार चौक मस्जिद गोबर टोली मस्जिद के साथ सभी मस्जिदों में सुबह से ही लोग नमाज अदा करने के लिए पहुंचने लगे थे नमाज अदा करने के बाद लोगों ने कुर्बानी भी दिया।

इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक बकरीद को ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ईद उल अजहा का पर्व इस साल 10 जुलाई यानी आज मनाया जा रहा है। बकरीद को मुस्लिम समाज के लोग त्याग और कुर्बानी के तौर पर मनाते हैं।

तीन हिस्सों में होता है बंटवारा
बकरीद के दिन जिस बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसे तीन भागों में बांटा जाता है। जिसका पहला हिस्सा अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को दिया जाता है। दूसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों और तीसरा परिवार के लोगो को दिया जाता है।

कुर्बानी के नियम

कुर्बानी का पहला नियम है कि जिसके पास 613 से 614 ग्राम चांदी हो या इतनी चांदी की कीमत के बराबर धन हो सिर्फ उन्हीं लोगों को कुर्बानी देनी चाहिए।

जो व्यक्ति पहले से ही कर्ज में हो वह कुर्बानी नहीं दा सकता है।

जो व्यक्ति अपनी कमाई में से ढाई फीसदी हिस्सा दान देता हो साथ ही समाज की भलाई के लिए धन के साथ हमेशा आगे रहता हो उसे कुर्बानी देना जरुरी नहीं है।

ऐसे पशु जिसे शारीरिक बीमारी हो, सींग या काम का अधिकतर भाग टूटा हो और छोटे पशु की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है।

इसके अलावा ईद की नमाज के बाद ही मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है।


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