हजारीबाग; पांच सौ एक कन्या कुवांरी व महिलाओं के साथ बड़वार में निकला भव्य कलश यात्रा।
कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ राधाकृष्ण प्राण प्रतिष्ठलक्ष्मी नारायण महायज्ञ विधायक मनीष जायसवाल ने कहा कि यज्ञ के आयोजन से वातवरण में शुद्धता के साथ संस्कार में विकास होता है।
दारू प्रखण्ड के इरगा पंचायत अंतर्गत बड़वार में नवनिर्मित राधा कृष्ण मंदिर में राधा कृष्ण की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा हेतु श्री श्री 108 श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया है।इस महायज्ञ का शुभारम्भ शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया। इस कलश यात्र में 501 कुंवारी कन्या व महिलाओं ने मंदिर परिसर से कलश उठाया। जो 2 किमी दूर स्थित उतर वाहिनी कोनार नदी गाजे बाजे व जय श्री कृष्ण राधे राधे नारो के साथ पहुंचे । जहां आचार्य प्रेमचंद पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चारण व वैदिक कर्मकांड के साथ गंगा पूजन व बरुन देव का अव्हावन कर कलश में जल उठवाया। कलश में जल भर कर सभी कलश यात्री यज्ञ मंडप में अपने कलश स्थापित किया।
जहां समिति के ओर से सभी कलश यात्रियों को शर्बत पिलाकर उपवास तोड़ावाया गया।यह महायज्ञ 28 अप्रैल को पूर्णाहुति ,महाभण्डारा व जागरण के साथ संपन्न होगा। यज्ञ के प्रथम दिन 22 अप्रैल को कलश यात्रा, पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, 23 अप्रैल को वेदीपुजन, स्तम्भ पूजन व अन्नाधिवास, 24 अप्रैल को पूजन हवन, पुष्पाधिवस व फलाधिवास, 25 अप्रैल को मंडपपूजन,वेदीपुजन व घृताधिवास, 26 अप्रैल को मण्डप पूजन वेदी पूजन व नगर भ्रमण, 27 अप्रैल को पिंडी पूजन हवन व प्राण प्रतिष्ठा,28 अप्रैल को भगवान का पूजन सामूहिक हवन, वेदी पूजन पूर्णाहुति ,जागरण के साथ संपन्न होगा। साथ ही प्रतिदिन संध्या में महाआरती व प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। यज्ञ को सफल बनाने में यज्ञ समिति के अध्यक्ष संतोष यादव, सचिव इंद्रनाथ यादव, कोषाध्यक्षय अनिल यादव, विकास यादव, निरंजन यादव, बीरेंद्र यादव ,त्रिलोकी प्रसाद यादव सहित सभी ग्रामीण जुड़े हुए है।
यज्ञ से वातावरण में शुद्धता व संस्कृति का का होता है विकास:-बड़वार में राधा कृष्ण मंदिर प्राण प्रतिष्ठा व श्री श्री महालक्ष्मी नारायण महायज्ञ के कलश यात्रा में सदर विधायक मनीष जायसवाल ने शिरकत किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस किसी क्षेत्र में यज्ञ का आयोजन होता है वहाँ निश्चित रूप से वातावरण में शुद्धता के साथ साथ संस्कार का विकाश व सनातन धर्म की आस्था में विश्वास जागृत होता है। साथ ही उन्होंने क्षेत्र के लोगों को इस महायज्ञ के पावन बेला में शुद्धता के साथ स्वंय को तन मन व धन के साथ समर्पित करने का बेला है। इसे व्यर्थ न जाने दे।













