हज़ारीबाग; मनरेगा योजना से मजदूरों को नहीं मशीनों को हो रहा रोजगार उपलब्ध।
इचाक :प्रखंड के अधिकारी और जनप्रतिनिधि बाज आने को तैयार नहीं मजदूरों की जगह मशीनों से हो रहा काम देश में रोजगार की समस्या विकराल रुप लेता जा रहा है जबकि सरकार के तरफ से कई तरह के रोजगार उपलब्ध करवाने तथा मजदूरों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके तथा पलायन को रोका जा सके इसके लिए कई योजनाओं को संचालित किया जा रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) भी मजदूरों को रोजगार देने का सबसे बड़ा संसाधन है।
मगर अब मनरेगा योजना में मजदूरों को काम ना देकर बड़ी बड़ी मशीनों से कार्य को किया जा रहा है तथा फर्जी जाँब कार्ड के द्वारा अवैध तरीके से संबंधित ठेकेदार प्रखंड एवं पंचायत स्तर के अधिकारी व सरकारी बाबूओं की मदद से पैसो का बंदरबाट किया जा रहा है। मनरेगा योजना सरकारी बाबूओं के लिए एक दुधारु गाय की तरह है जिसमें एक बार योजना को मशीन से काम करा कर पुर्ण करो और धीरे -थिरे पैसो की निकासी करते रहो।
ताजा मामला जिले के इचाक प्रखंड अंतर्गत चम्पानगर नावाडीह पंचायत का है जब सारे लोग छठ पूजा के खंडना मे व्यस्त थे तब रात्रि करीब 11 बजे अनिरुद्ध उपाध्याय पिता रामनाथ उपाध्याय अपने उसी डोभा को जेसीबी मशीन से मिट्टी काटकर ट्रैक्टर के द्वारा बाहर कर रहे थे। डोभा, टिसीबी ,मेढ़बंदी इत्यादि मनरेगा की सभी बड़ी छोटी योजनाओं को मशीन के द्वारा कार्य को किया जा रहा है जबकि मजदूरी नहीं मिलने के कारण गरीब मजदूर अपने परिवार व बच्चों को छोड़कर दूसरे प्रदेशों में रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं।
मामले की जानकारी नहीं है – मुखिया
पंचायत की मुखिया काजल देवी ने कहा की इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है। उन्होने कहा की जांच कर दोषीयों पर कारवाई की जाएगी तथा योजना में आगे किसी भी तरह का
भुगतान नहीं किया जाएगा।
पैसों की निकासी हुई पर मेरा भुगतान नहीं- मेठ रिता उपाध्याय
योजना की मेठ रिता उपाध्याय ने कहा की की पहले भी पैसा निकाला गया पर आज तक मेरे मेठ की मजदूरी कि भुगतान नहीं किया गया।
संवाददाता- श्यामदेव मेहता की रिपोर्ट।











