हजारीबाग झारखंड का एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, हालांकि इसका प्रभाव पहले की तुलना में कम हुआ है। लेकिन सरकारी भत्ते में इजाफा।

हाल के समय में, झारखंड में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है और कई जिलों को “नक्सल प्रभावित” की सूची से हटा दिया गया है।

हजारीबाग झारखंड राज्य में एक नक्सल प्रभावित जिला है, और वहां तैनात BSF (सीमा सुरक्षा बल) के जवानों को केंद्रीय सरकार द्वारा “खतरा और कठिनाई भत्ता” (Risk and Hardship Allowance) दिया जाता है।

BSF (सीमा सुरक्षा बल) के जवानों को मूल वेतन के साथ-साथ कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं। इनमें महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता (एचआरए), परिवहन भत्ता, और अन्य भत्ते शामिल हैं।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों और अधिकारियों के लिए इस भत्ते की दरों में बढ़ोतरी की गई है।
फरवरी 2019 के एक आदेश के अनुसार:

* इंस्पेक्टर रैंक तक के जवानों को ₹9,700 से बढ़ाकर ₹17,300 प्रति माह भत्ता मिलता है।

* इंस्पेक्टर रैंक से ऊपर के अफसरों को ₹16,900 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह भत्ता मिलता है।

यह भत्ता उन सभी CAPF कर्मियों को मिलता है जो नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात होते हैं, और हजारीबाग भी इसमें शामिल है। यह विशेष भत्ता उनके सामान्य वेतन और अन्य भत्तों के अतिरिक्त होता है।

हजारीबाग उन जिलों में से है जहां नक्सल समस्या “करीब-करीब खत्म हो चुकी है” या “मध्यम रूप से प्रभावित” की श्रेणी में आता है, न कि “सबसे अधिक प्रभावित” जिलों में।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यहां नक्सली गतिविधियां पूरी तरह से समाप्त हो गई हैं। अभी भी इक्का-दुक्का घटनाएं सामने आती रहती हैं, जैसे कि हाल ही में हजारीबाग के केरेडारी में टीएसपीसी उग्रवादियों द्वारा वाहनों में आग लगाने की घटना।
सरकार और सुरक्षा बल लगातार नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कई योजनाओं और मदों के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। यह सहायता मुख्य रूप से नक्सल विरोधी अभियानों, बुनियादी ढांचे के विकास और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को मुख्यधारा में लाने पर केंद्रित होती है।

हालिया वित्तीय आवंटन और योजनाएं:

* वर्ष 2025-26 में ₹125.54 करोड़: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड के नक्सल प्रभावित जिलों में अभियान और अन्य संबंधित मामलों के लिए साल 2025-26 में ₹125.54 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए राशि जारी की है। यह राशि पश्चिमी सिंहभूम सहित आठ उग्रवाद प्रभावित जिलों में एसआरई (Security Related Expenditure) स्कीम के तहत खर्च की जाएगी। इसमें नक्सल अभियान, लॉजिस्टिक सपोर्ट, नए कैंपों का निर्माण, गुप्तचरों, संचार और हथियारों की खरीद शामिल है।

* विशेष केंद्रीय सहायता योजना: भारत सरकार ने झारखंड सहित अन्य उग्रवाद प्रभावित राज्यों में विशेष केंद्रीय सहायता योजना का विस्तार किया है। इस योजना के तहत ₹100 करोड़ की राशि प्रस्तावित है। इस योजना का उद्देश्य सार्वजनिक आधारभूत संरचना और सेवाओं से संबंधित “क्रिटिकल गैप्स” को भरना है।

* विशिष्ट जिलों को सहायता: अति नक्सल प्रभावित जिला चाईबासा को हाल ही में ₹15 करोड़ दिए गए हैं, जबकि गुमला, लातेहार, लोहरदगा और गिरिडीह जैसे संवेदनशील जिलों को ₹5-5 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।

* सड़क कनेक्टिविटी: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं, जिनमें केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी है:

* प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): इसमें राज्य की हिस्सेदारी ₹274 करोड़ है, जबकि कुल योजना का आकार ₹684 करोड़ है।

* नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी बढ़ाना (RCPLWEA): इसमें राज्य की हिस्सेदारी ₹50 करोड़ है, और कुल योजना का आकार ₹125 करोड़ है।

* मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना: यह पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित है, जिसका योजना आकार ₹950 करोड़ है।

* मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना: यह भी पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित है, जिसका योजना आकार ₹300 करोड़ है।
अन्य पहलें और सहायता:

* कौशल विकास और रोजगार: नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए “हुनर से रोजगार” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण और प्लेसमेंट दिया जाता है।

* पुनर्वास और आजीविका: पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए भी योजनाएं हैं, जैसे कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), जिसके तहत पूर्व नक्सलियों को मछली पालन जैसे व्यवसायों के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

* सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण:

पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत भी केंद्र सरकार राज्यों को सहायता प्रदान करती है ताकि पुलिस बल को बेहतर उपकरण और प्रशिक्षण मिल सके।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए राज्यों के प्रयासों में लगातार सहयोग करती है। मार्च 2026 तक झारखंड समेत देश के सभी राज्यों से नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

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