सुखाड़ से निपटने के लिए सरकार ने शुरू की तैयारी, किसानों को फसल राहत योजना का मिलेगा लाभ: कृषि मंत्री
कृषि मंत्री ने कहा- 10 दिनों के अंदर भारी बारिश नहीं हुई, तो पलामू प्रमंडल में उत्पन्न होगी 30 साल पूर्व वाली स्थिति
कमजोर मानसून के मद्देनजर कृषि मंत्री ने पलामू प्रमंडल के जिलों का किया दौरा
मेदिनीनगर : पलामू प्रमंडल क्षेत्र में कमजोर मानसून के मद्देनजर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री श्री बादल आज पलामू प्रमंडल के जिलों का दौरा किया। किया। इस दौरान उन्होंने फसलों के अच्छादन का आकलन किया, तो स्थिति चिंताजनक मिली। प्रमंडलीय मुख्यालय स्थित परिसदन भवन, पलामू में संवाददाता सम्मेलन कर उन्होंने पलामू भ्रमण के दौरान किये गये आकलन की विस्तृत जानकारी दी।
साथ ही उन्होंने कहा कि मानसून की स्थिति को देखते हुए सरकार व स्थानीय प्रशासन किसानों के लिए संवेदनशीलता के साथ खड़ा है। पलामू प्रमंडल सहित राज्य में सुखाड़ की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। किसानों को झारखंड राज्य फसल राहत योजना का लाभ दिया जाएगा।
इसके तहत फसल में 30% से 50% की क्षति पर 3,000 रूपये प्रति एकड़ अधिकतम 15,000 रूपये एवं 50% से अधिक के फसल नुकसान पर क्षतिपूर्ति के रूप में 4,000 रूपये प्रति एकड़ अधिकतम 20,000 रूपये का लाभ दिये जाने का प्रावधान किया गया है।
यह प्रावधान रैयती जमीन एवं बटाई पर खेत लेकर खेती करने वालों किसानों पर लागू होगी।
मंत्री ने कहा कि सुखाड़ की स्थिति होने पर आपदा प्रबंधन के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार मिलकर राहत कार्य चलाएगी। उन्होंने ने कहा कि मंगलवार को सभी विभागों की संयुक्त बैठक हो गई है। इसमें पलामू में वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी बात उपायुक्त से हुई है और उपायुक्त ने 15वें वित्त की राशि से पुराने बांध के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पशुओं को भी सुरक्षित रखने की योजना है। उनके लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पशुपालन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पशुओं के चारे के लिए एक्शन प्लान तैयार करें।
पलामू में हर वर्ष सुखाड़ की स्थिति की विभीषिका देखते हुए यहां के लिए स्थाई समाधान की तैयारी भी सरकार कर रही है। मजबुत एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा और वैकल्पिक खेती कराने की पहल होगी, लेकिन तत्काल वर्तमान स्थिति निपटने की तैयारी है।
मंत्री ने कहा कि पलामू प्रमंडल का दौरा कर उन्होंने फसलों के अच्छादन का आकलन किया, तो पाया कि गढ़वा जिले में एक से डेढ़ प्रतिशत बुआई हुआ है, जबकि पलामू जिले में अबतक 0.25% ही बुआई का कार्य हो पाया है, जबकि 15 मई से 15 अगस्त तक बुआई का मुख्य समय होता है।
करीब 2 माह अधिक समय बीतने के बाद भी स्थिति भयावह है। यहां वास्तविक रेनफॉल 83% कम हुआ है। उन्होंने कहा कि भ्रमण के दौरान पाया कि पलामू के सतबरवा के कुछ हिस्सों में करीब 5 से 6 एकड़ धान का आच्छादन हुआ है। वहीं हजारों-हजार एकड़ खेत खाली पड़े हैं। उन्होंने किसानों से जब बातचीत की तो किसान हताश एवं निराश थे। कृषि मंत्री ने कहा कि 10 दिनों के अंदर यहां बारिश नहीं होती है, तो 30 साल पूर्व की सुखाड़ वाली स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि पुराने बांधों का जीर्णोद्धार एवं तालाबों से गाद निकालने के लिए भी एक्शन प्लान तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही प्रधानमंत्री टपक सिंचाई का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी है। सरकार के साथ स्थानीय जिला प्रशासन किसानों की समस्या को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी।
प्रेसवार्ता में श्री बादल के साथ कांग्रेस के पलामू जिला अध्यक्ष बिट्टू पाठक, झामुमो के पलामू जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिन्हा आदि उपस्थित थे।
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