हजारीबाग; पाक महीना रमज़ान के आखिरी जुम्मा अलविदा की नमाज अदा की गई।
सदर प्रखंड के मेरु मस्जिद में आज रमजान महीने के आखरी जुम्मा अलविदा की नमाज अदा की गई। इस साल रमजान महीने में तपती धूप और चिलचिलाती गर्मी में रोजेदारों ने अपना फर्ज निभाया और रोजे रखे इस बार मेरु मस्जिद में दो खत्म तरावी पढ़ी गई जिसमें एक खत्म तरावी दस दिनों तक चला तो वहीं दूसरी तरफ सताईस दिनों तक खत्म तरावी पढ़ी गई।अगर इस बार रविवार को ईद की चांद नजर आती है तो सोमवार को ईद की नमाज पढ़ी जाएगी नहीं तो मंगलवार को ईद की नमाज होगी।
अलविदा का मतलब होता है किसी चीज के रुखसत होने का यानी रमजान महीना इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते है और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते है लोग इस महीने में सिर्फ नेकियां कमाने में लगे रहते है अपने रब को मनाने के लिए रोजे रखते हैं नमाज पढ़ते हैं तरावी पढ़ते फितरा और जकात निकालते हैं गरीबों को मदद करते हैं इस तरह से पूरे महीने अपने रब की इबादत करते हैं अब यह महीना हमसे रुखसत हो रहा है। इसलिए इस मौके पर जुमे में अल्लाह से खास दुआ की जाती है कि आने वाला रमजान हम सब को नसीब हो। रमजान के महीने में आखिरी जुमा (शुक्रवार) को ही अलविदा जुमा कहा जाता है। अलविदा जुमे के बाद लोग ईद की तैयारियों में लग जाते है। अलविदा जुमा रमजान माह के तीसरे अशरे (आखिरी 10 दिन) में पड़ता है। यह जुमा बहुत ही अफज़ल होता है क्युकी इससे जहन्नम (दोजक) से निजात मिलती है।









