हज़ारीबाग; शांति और सद्भावना के साथ मनाया गया मोहर्रम का त्यौहार।
हजारीबाग सदर प्रखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मेरु कर्बला में मोहर्रम की दशमी शांति और सद्भावना के साथ मनाया गया मेरु कर्बला में आसपास के गांव हुटपा, जिनगा, कवालू के अकीदतमंद पहुंचकर बारी-बारी से फातिहा दिलाया और शांतिपूर्वक सभी अपने-अपने घर चले गए।
पिछले साल की तरह इस साल भी कोविड-19 को देखते हुए मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया झारखंड सरकार के द्वारा दिए गए गाइडलाइंस के अनुसार कोई भी डीजे या जुलूस नहीं निकाली गई मोहर्रम की नवमी की रात में इमामबाड़ा में इमाम हुसैन की याद में फातिहा दिलाया गया।
मौके पर मुफस्सिल थाना प्रभारी बजरंग महतो अपने दल बल के साथ मौके पर मौजूद रहे ताकि कोई अप्रिय घटना को होने से बचाया जा सके और सरकार के द्वारा दिए गए गाइडलाइंस का पालन किया जा सके। साथ ही मेरु के उप मुखिया जयशंकर मिश्रा उर्फ टुन्नू, दशरथ यादव उर्फ लालू भी मौजूद रहे
मुस्लिम समुदाय के लिए मोहर्रम बहुत अहमियत रखता है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, वर्ष का पहला महीना मोहर्रम का महीना होता है। इस माह की शुरुआत से मुस्लिम समुदाय अपना नव वर्ष प्रारंभ करते हैं। इस महीने के नौवें दिन की रात्रि से आशूरा शुरू होता है और दसवें दिन तक रहता है।
इस महीने की दसवीं तारीख पर मोहर्रम मनाया जाता है जिसे रोज-ए-आशूरा और यौमे आशूरा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और इमाम हसन की कुर्बानी को याद किया जाता है।
कर्बला की जंग (680 ईसवी) के दौरान हजरत इमाम हुसैन और इमाम हसन की शहादत हो गई थी। उसी की याद में मोहर्रम का पर्व इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने की दसवीं तारीख को मनाया जाता है।








