हज़ारीबाग; दीपावली में कुम्हार के चाक से बनी मिट्टी के दिये घरों को जगमगाने के लिए तैयार।

हज़ारीबाग; दीपावली में कुम्हार के चाक से बनी मिट्टी के दिये घरों को जगमगाने के लिए तैयार।

कुम्हारों के चाक से बने मिट्टी के दीपक इस बार आपके घरों को दीपावली के मौके पर जगमग कर देने के लिए तैयार हो रहे हैं ।इस बार बेहतर कमाई होगी इसकी सोच के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कुम्हार और उसके परिवार के सदस्य जिसमें छोटे छोटे बच्चे भी शामिल हैं उनके द्वारा मिट्टी के दीपक,लक्ष्मी गणेश की छोटी-छोटी मूर्तियां, बच्चों को खेलने के लिए खिलौने एवं गुल्लक बनाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा  कुम्हारों के चाक से बनने वाले दीपक से घरों को जगमगाने के लिए की गई अपील का असर भी गांव में देखने को मिलेगा। इस आस में बड़े पैमाने पर मिट्टी के कुम्हारों का परिवार इस कार्य मे जुटा हैं। बढ़ती महंगाई की वजह से मिट्टी के दाम भी वृद्धि हुई है। कुम्हारों के द्वारा जो मिट्टी इस्तेमाल किया जाता है  समय के साथ इसके मूल्यों में भी वृद्धि होती रहती है।
यही वजह है कि यहां पर कुम्हार के लिए दीपक आदि मिट्टी की सामग्री का निर्माण करना महंगा पड़ता है। और बाजार में पहुंचने पर यह और भी महंगा हो जाता है। जबकि चाइनीस लाइट – झालर, चीनी मिट्टी से बने दीपक, इन दिनों सरकारी रोक के बावजूद आसानी से बाजारों में देखी जा रही है परंतु अब तक इस पर रोक नहीं लगी है। इस पर सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 
लोकल फॉर वोकल का नारा धीरे-धीरे बुलंद हो रहा है और फिर से लोगों का रुझान मिट्टी के बनाए गए पारंपरिक दीपक और अन्य सामग्री की ओर बढ़ने लगा है।ऐसे में कुम्हारों की आस जगी है ।अगर उन्होंने पारंपरिक व्यवसाय को बृहद  पैमाने पर अपनाया तो सदैव आर्थिक रूप आगे भी बढ़ सकते हैं।
दैनिक बाजार मे दीया विक्रेता मोती पंडीत ने बताया कि इस वर्ष लगभग 10,000 दिए तैयार किए हैं हलांकि बीच-बीच में बरसात होने के वजह से कई मिट्टी के दीए बनते बनते ही खराब हो गए हैं । दीया की कीमत ₹2 से लेकर 5से  ₹10 तक की बेची जा रही है।
बरकट्ठा से संवाददाता; मंटू पांडे की रिपोर्ट।

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