हज़ारीबाग; मृत्युभोज दहेजप्रथा नशापान भूत-डायन जैसी कुप्रथा का त्याग करें समाज-डॉ आरसी प्रसाद मेहता।

हज़ारीबाग; मृत्युभोज दहेजप्रथा नशापान भूत-डायन जैसी कुप्रथा का त्याग करें समाज-डॉ आरसी प्रसाद मेहता।

हजारीबाग-संत रविदास भगवान बुद्ध बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर सभी एक ही विचारधारा के समाज सुधारक थे इन लोगों ने बाहरी आडंबर स्वार्थ हेतु दान नहीं देने  का सुझाव दिए है। संत रविदास ने कहे थे मन चंगा तो कठौती में गंगा एक साथ है तो सब जाय। 
संत रैदास ने कहे हैं कि उस बामहन को ना पूजिए जो हो गुण विहीन, उस चांडाल को पूज्य जोहो गुण निपुण।

मन चंगा तो कठौती में गंगा जो जन्मदिन में भूल ही जाती है इनकी बातों का अनुकरण करना चाहिए। झारखंड कुशवाहा महासभा के केंद्रीय सलाहकार कांग्रेश के पूर्व विधायक प्रत्याशी डॉ आरसी प्रसाद मेहता ने रैदास जयंती के सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक युग में मृत्यु भोज राक्षसी कुप्रथा है। नशा-पान डायन भूत प्रथा अंधविश्वास का त्याग करें झारखंड में भी बिहार की तर्ज पर पुर्ण नशा बंदी कानून लागू हो। उपरोक्त कुप्रथा से पिछड़े अति पिछड़ा हो रहे है। 

गांव में इस  कुप्रथा से किसान मजदूर गरीब हो रहे हैं  दहेज प्रथा बेटियों के लिए भ्रूण हत्या कारी कुप्रथा है बरहेट प्रथा किसानों के लिए नुकसान दे कुप्रथा है क्योंकि गांव में किसी के यहां छुतका मृत्यु होने पर होने पर 15 दिन तक रोपा किसानी का कार्य नहीं होता है जिससे किसान ज्यादा पिछड़ रहे हैं अतः बरहेट प्रथा का किसान त्याग करें। मृत्युभोज इत्यादी कुप्रथा के कारण गरीब मानव का खेत बिक रहा है लोग कर्ज में डूब रहे हैं
अतः संत रैवदास जयंती के शुभ अवसर पर हम मानव प्रतिज्ञा ले और मृत्यु भोज इत्यादि अंधविश्वासी कुप्रथा का त्याग करें और मानव का कल्याण करें धन्यवाद।

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